किसने दिलवाई आज़ादी भारत को, गाँधी या बोस?

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जनरल बक्शी की अभी प्रकाशित होने वाली किताब Bose: An Indian Samurai में जनरल बक्शी जो की मिल्लितारी हिस्टोरियन है और साथ में नेताजी पर काफी रिसर्च कर चुके है. अपनी किताब में लिखा है के पूर्व प्रधान मंत्री क्लेमेंटक आतली, यूनाइटेड किंगडम ने येह कहा था की नेता जी की इंडियन नेशनल आर्मी का रोल सबसे महत्पूर्ण था और नॉन-वायलेंट मूवमेंट जो की गाँधी-नेहरु के नेत्रित्व में था उसका कोई जायदा रोल नहीं था.

हालही में दतावेज जो की जुडे है नेता जी के रहस्मय मौत से declassify किये गये है.. जिन में क्या तथ्य निहित है यह तो समय ही बताएगा परन्तु एक बडी डिबेट जरूर चल पठी है नेता जी और इंडियन नेशनल आर्मी के रोल को ले कर और नेता जी के आखिरी दिनों की सचाई को लेकर.

Clement_Attlee

जनरल बक्षी ने जिक्र किया है तब के ब्रिटिश प्राइम मिन्स्टर इन न्यू डेल्ही आतली और बंगाल के गवर्नर उस समय के जस्टिस पी बी चात्रबोर्टी के बीच की बातचीत का. 1946 में लेबर पार्टी के लीडर और ब्रिटिश प्रीमियर जिनओने इंडिपेंडेंस ग्रांट की भारत को, इंडिया में आये थे और कोल्कता चक्रोबोर्टी जी के गेस्ट बने थे. अत्त्ली ने एक बड़ा कारन इंडियन आर्मी और नेवी पेर्सोंन्नेल की ख़तम होती हुई वफादारी को बतआया, जिसका एक कारन इंडियन नेशनल आर्मी से बुरा बरताव भी था. भारत में उस वक़्त ऑफिसर्स इंडियन नेशनल आर्मी को गद्दारी, ह्त्या और यातनाओ देने का दोषी बनाकर कोर्ट म्मार्तिअल किया गया था जिसे हम रेड फोर्ट ट्रायल के नाम से जानते है.

इस से जो भारतीय ब्रिटिश आर्मी में थे रोष भर गया और इसने एक रिवोल्ट का रूप ले लिया जिससे ब्रितिशेर खबरा गए. 25 लाख फौजी सोल्दिएर्स को decommission किआ गया था. उस समय सिर्फ 40000 ब्रिटिश ट्रूप्स इंडिया में थे और वोह 25 लाख युद्ध से लोटे इंडियन सोल्दिएर्स जो की हतोसाहित थे ब्रित्स्हेरस के रवियेय से और इंडियन नेशनल आर्मी की साथ की जाने वाली व्यवहार के.

इससे ये निष्कर्ष निकलना के गाँधी और नेहरु ने कोई रोल अदा नहीं की कहना गलत होगा परन्तु नेता जी के योगदान को भी सामान रूप से और सही रूप में देखने की जरूरत है.

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