विस्सलब्लोअर बनने का यह मिला फल

0
262

छत्तीस वर्षीय प्रवीन माहोरे जो कभी facilitator की तोर पर फिल्म प्रोदुसर्स के लिए काम करते थे उन्हें जरूरी सेंसर सर्टिफिकेट दिलवा कर किसी भी फिल्म के रिलीज़ से पहले. और अच्छी सैलरी भी अर्जित करते थे वह इस कम से लगभग 80,000 प्रति माह. वह यह काम 2005 से कर रहे थे. लेकिन उनका व्हिस्त्लेब्लोवेर बनना सेंसर बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार के खीलाफ उनके लिए भारी पड गया. राकेश कुनार का रिश्वत लेना प्रोदुसर्स से सर्टिफिकेट इशू करने के बदले, इस काण्ड का खुलासा करने के लिए. मोहरे ने CBI के साथ मिल कर राकेश कुमार जो उस वक़्त CEO थे सेंसर बोर्ड के रिश्वत देने का नाटक किया और उन्हें रंगे हाथ पकडवा दिया. परन्तु एक अच्छा काम करने के बदले और एक क्र्रप्त व्यक्ति को एक्स्पोसे करने के बदले उन्हें परुस्कार के बदले नौकरी से हाथ धोना पड़ा. उनका प्रोडूसर फसिल्ताटर ID ब्लाक कर दिया गया बिना किसी कारण के.

प्रवीन कहते है की उनके द्वारा कोई भी सर्टिफिकेट पास न केने का unwritten रूल पास कर दिया गया सेंसर बोर्ड में. इसके चलते उनका काम ख़त्म हो गया. उन्होंने जो पैसा राकेश कुमार को एक नकली facilitator सीबीआई के बेहल्फ़ पर दिया था, 50000 रुपए वो भी अभी तक वापिस नहीं मिले. फिल्म इंडस्ट्री उनको अब एक outcast की तरह ट्रीट करती है और CBI उनका पैसा भी अभी तक रिफंड नहीं किया.

pravin

नौ महीने तक कोई काम न मिलने पर प्रवीन मोहरे अब गोरे में एक छोटे से स्टाल पर सब्जी-करतारी बेचते है अपना घर चालने के लिये. उनके बीबी और छोटी बच्ची भी भूगत रहे है उनकी अच्छाई का नतीजा. वह कहते है की करप्शन के अगेंस्ट लड़ाई में आप अकेले होते है और कोई भी आपके साथ नहीं देता.

Comments

comments