शशि थरूर ने इस परिचर्चा में पाकिस्तानी आर्मी के रोल उनके देश में को बिलकुल सही तरह से बताया है. पाकिस्तानी आर्मी का दखल वहाँ हर जगह है और सिविलियन गवर्नमेंट को अपने हिसाब से चलाते है. कई पर भी इकॉनमी में इतना बड़ा रोल आर्मी अदा नहीं करती जितना के पाकिस्तान में और सभी बड़े संस्थाए आर्मी के आधीन ही है. ऐसे में आर्मी कभी भी अपना रोल को छोटा नहीं करना चाहेगी और इसकेलिए उन्हें हर वक़्त युद्ध जैसे हलात दिखाने पड़ते है भारत में आतंकवाद द्वारा, रिश्तों को कभी भी सामन्य न करके.

शशि थरूर का इस समस्या को पार करने का उपचार है people-to-people कांटेक्ट हर क्षेत्र में, वनिजय, संस्कृत, खेल जिसे की भारत को पसंद करने वालो की तादाद वहां बढ़े. इसमें वह आर्मी द्वारा चलित संस्थानों को भी शामिल करने को कहते है. यह जल्दी होने की कोई उम्मीद नहीं है क्यूंकि पाकिस्तान में भारत के खिलाफ सिर्फ नफरत ही देखी जाती है.

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