मालदा का सच

Truth of Malda

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मालदा वेस्ट बंगाल में हाल में जो घटना हुई जिसमे अनुमानित डेढ़ लाख मुस्लिम भीड़ ने प्लोइस स्टेशन सहित कई वहानो और BSF के भी एक वाहन को देहन कर दिया. असल में कमलेश तिवारी के आपतिजनक कथन के एक महीने बाद इस तरह की सुनोय्जित और पहले से ही सोची समझी मार्च असल में एक अपर्धिक सोच के साथ किया गया. मकसद पुलिस रिकार्ड्स जो की उजागर करती थी वहा पर पनपते अफीम और नकली करेंसी नोट्स की बड़े नेटवर्क को जो की चलया जाता है वहा के कुछ अपराधियो द्वारा जिन्होंने मुस्लिम रोष को अपने स्वार्थ के लिये इस्तमाल किया.

दरअसल कलिचक मालदा में गैंग्स जो की इन कार्यो में लिप्त है वो मुस्लिम है और उन्होंने इस बात का फायदा उठा कर इससे कम्युनल रंग दे कर उसकी आड़ में अपने खिलाफ पुलिस रिकार्ड्स और सबूतों को नष्ट करवा दिया. इस के बाद इस का खूब राजनीतिकरण भी हुआ परन्तु किसने मूल कारन पर जाने की अवाक्ष्ता नहीं समझी जिससे ऐसा प्रतीत होतो है की इने राज्नितियोगो का भी साथ या सरंक्षण प्राप्त है.

जो भी हो मालदा के सच को उजागार करने के लिये राज्य सरकार एवं केंद्रीय सरकार को मिल कर मालदा को भारत का अफ़ग़ानिस्तान बनाने से रोकना चईये.

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