सेक्सुअल हर्रस्मेंट चार्जेज के बाद भी आर के पचौरी को मिला प्रमोशन

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पावरफुल और बड़ी पोजीशन पर बैठे लोग जिनका क्लोउट हो वह कुछ भी करे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता है. आर के पचौरी को TERI का executive chairman बनया जा रहा है और सभी executive powers के साथ. ऐसा प्रतीत होता है की TERI जैसी संस्था जिसको पचौरी तीन दशक से भी जायदा से चला रहे है उनको इस को बनाने के एवज हेतु संस्था का कण्ट्रोल दे दिया गया है.

 

पिछले साल नवम्बर में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मुताबिक अजय माथुर चार्ज नही ले पाए थे क्यूंकि पचौरी उन्हें कण्ट्रोल handover नहीं करना चाहते थे. complainant को TERI छोड़ना पड़ा हर्रस्मेंट और प्रेशर के कारण. एक रेसेअर्चेव्र जो की complainant को दोस्त था सीनियर्स द्वारा फुसलाने पर out ऑफ़ कोर्ट सेटलमेंट को पुश करने को कहा गया था.

 

यह दुभाग्यपूरण है की इंटरनल कोम्मित्ते द्वारा दोषी पाए जाने के बाद भी और FIR फाइल होने के बाद भी सेक्सुअल हर्रास्स्मेंट अंडर सेक्शन IPC सेक्शन 354/(a)/(d) और 506 ऐसा लगता है जैसे कुछ नहीं हुआ और पचौरी को प्रमोट किया जा रहा है.

 

आर के पचौरी एक बड़े scientist है और उनका योगदान सह्रानियेय है क्लाइमेट चेंज को लेकर. उनका अधिकार है की वह अपने को देफेंद करे और चार्जेज को खारिज करे लेकिन यह तभी हो सकता है जब वह TERI से निकल कर सबको बिना किसी प्रेशर के फेयर इन्वेस्टीगेशन करने दे. कोई भी अपने vice chairman के खीलाफ नही बोलेंगा जिसके पास executive पावर्स हो. इस तरह तो गलत करने वालो को और बल मिलेंगा यह जानकार की वह system को अपने advantage के हिसाब से तोड्मरोड़ सकते है. और उनको इस तरह की हरकत करने पर कोई सजा नहीं मिलेंगी.

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