जाने नासा के अंतरिक्ष यान ‘जूनो’ के बारे में खास बातें, जिसने कर लिया है ‘बृहस्पति ग्रह’ की कक्षा में प्रवेश…

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अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट ‘जूनो’ आज नासा के लिए एक ऐसी उपलब्धि ले कर आया है जिसे सारी दुनिया ने आज सर आँखों पर रखा लिया है .

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जूनो को कब छोड़ा गया था ..और क्यों है जूनो जरूरी

5 अगस्त 2011 को जूनो को फ्लोरिडा के केप केनवेराल से छोड़ा गया था – लगभग आज से ठीक 5 साल पहले. जुपिटर तक का जूनो का सफ़र 2.7  अरब किलोमीटर का था, जिसे जूनो ने अब पूरा कर लिया है .

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जुपिटर ग्रह के बारे में जो सबसे बड़ी बात आज हमे जाननी चाहिए वोह यह है के, जुपिटर ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है, और यह गैसों और गैसों के बादलो से बना है . हलाकि इन्सान को अभी भी जुपिटर ग्रह के बारे में इतना कुछ मालूम नहीं है वही इस दिशा में नासा का जूनो मील का पत्थर साबित हो सकता है .

 

जूनो की गति में उछाल ऐसे आया 

जब जूनो को 2011 में जुपिटर के लिए नासा ने छोड़ा तब लगभग 2 साल के बाद ओक्टुबर 2013 में जूनो एक बार फिर धरती की तरह वापिस आया, पर यह जूनो की स्पीड बढ़ाने का एक तरीका था जिसे नासा ने अपनाया था, रिपोर्ट के अनुसार ऐसा करने से जूनो की गति जुपिटर की तरफ 14 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे बढ़ गयी थी.

 

Radition से जूनो कैसे पायेगा पार – देखिये इस इन्फोग्रफिक में 

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जूनो का नाम जूनो कैसा पड़ा;

यह किस्सा भी बेहद दिलचस्प है, ग्रीक मैथोलोजी में जूनो , जुपिटर ग्रह की पत्नी का नाम है, सिर्फ जूनो को ही बृहस्पति के भीतर झाकने की अनुमति प्राप्त है . इसी सोच के साथ नासा ने इस अन्तरिक्ष यान का नाम जूनो रखा .

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जुपिटर के बारे में ..

जुपिटर हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह होने के साथ साथ हमारे सौरमंडल का रक्षक भी है और हमारे सौरमंडल में सबसे पहले जुपिटर ग्रह की ही उत्पत्ति हुई थी .1300 पृथ्वियो को अगर मिला दिया जाये तब जाकर एक जुपिटर बनेगा, पृथ्वी के वजन से लगभग 360 गुना ज्यादा वजन है जुपिटर गृह का और अगर हमारे सौरमंडल के सभी ग्रहों के वजन को आपस में जोड़ दिया जाये तब भी अकेले जुपिटर का वजन सब से वजन के दो गुने से भी ज्यादा होगा. जुपिटर ग्रह के पास अपने 10 चाँद है, और यह हमारे सौरमंडल को साफ़ भी करता है, इसी की बदोलत कोई उल्का पिंड धरती तक नहीं पहुच पाता.

 

जुपिटर ग्रह के बारे में और ज्यादा विस्तार से जानने के लिए देखिये यह विडियो ;

 

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