ज़िन्दगी और मौत से झूझते लांस नायक हनामंथाप्पा शहीद हुए

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लांस निक हनमन थप्पा कोप्पद जिनको छे दिनों बाद रेस्क्यू किया गया था हिमस्खलन होने के पश्चात सिअचेन ग्लेशियर से, आज सुबह 11.45 बजे शाहदत को प्राप्त हुए आर्मी हॉस्पिटल दिल्ली में. माइनस 25 डिग्री और अवलांच की भिस्नता को भी परास्त करने वाला यह भारत का लाल 8 फेबुरारी को रेस्क्यू होने के बाद जो चमत्कार से कम नहीं है आज तीसरे दिन ज़िन्दगी की लड़ाई हार गया. परन्तु असल में एक विजेता है जिसने सभी विसमतओ का डटकर मुकबला किया. बर्फ के ढेर में air pocket में इतने दिनों तक जिंदा रहना आसान नही है. पर दुर्भग्य इस बात का है की इतना साहसी होने पर भी उनको बचाया नहीं जा सका.

मौत को मात दे वापिस जिंदगी में लौट आया

कर्नाटक के रहने वाले हनमन थप्पा ने अपने सर्विस के 13 वर्षो में से 10 वर्ष दुर्गम और मुश्किल जगहों पर बितायी. मोहरे जम्मू कश्मीर में 2003 से 2006 तक और फिर 2008 से 2010 तक वह कश्मीर पोस्टेड रहे और उन्होंने अधम्य सहास का परिचय दिया आतंवादियो के साथ लड़ाई में. हन्मंथापा मात्र 33 वर्ष के थे और उन्होंने मद्रास रेजिमेंट 19th बताल्लिओं अक्टूबर 25, 2002 को ज्वाइन की थी. प्रधानमंत्री मोदी ने भी दुःख व्यक्त किया लांस नायक हनामंथाप्पा के निधन पर.

हनमन थप्पा ने माइनस 45 डिग्री में बर्फ के ढेर के अन्दर कम ऑक्सीजन में भी अपने आपको ज़िन्दा रखा. एयर pocket के बनने के कारण वह इतने समय तक ऐसी विषम स्तिथिओ में भी सुर्विवे क्र पाए. परन्तु उनकी हालत इतनी भिगड चुकी थी की उनको बचाना अन्संभव हो गया.

हम इस भारत के वीर को और सभी जिन्होंने इस दुर्घटना में जाने खोयी को सलाम करते है.

सिअचेन अवलांच में शहीद हुए जवानों को सलाम

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