50 साल लगे इस सड़क को बनने में

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धनुषकोडी को अब मिलेगी एक नई आशा 

भारत के ये हिस्सा अब तक कता हुआ था देश दुनिया से, सिर्फ श्रीराम के भक्त ही यह आते थे और वोह भी मुश्किलों का सामना करते करते, पर अब धनुषकोडी की तस्वीर बदल जाएगी, उसको अपना खोया वर्चस्व वापिस हासिल होगा, हासिल होगा वोह सम्मान जिसका ये छोटा द्वीप हक़दार है , क्युकी अब ये सड़क के माध्यम से भारत देश, अपने देश से जुड़ने जा रहा है

धनुषकोडी, एक पवित्र जगह है तीर्थ यात्रिओ के लिए जो दक्षिण पूर्व सुदूर में पमबन दीप के निकट बसा हुआ है तमिलनाडु में, आज फिर से अपना खोया गौरव हासिल कर रहा है इसके लिए जो बधाई का पात्र है वोह है सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, जी हाँ एक सरकारी कार्यालय जिसने धनुषकोडी को दी है वोह सड़क जो टूट गयी थी आज से 50 साल पहले एक तूफ़ान की चपेट में आ कर 1964 ।

निर्माण कार्य 

रामनाथपुरम आधारित ठेकेदार, जिन्हें ये काम करने के लिए/ निष्पादन सौंपा गया था वोह यह बताते है के पाच किलोमीटर लंबा ये मार्ग इस महीने के अंत तक सार्वजनिक परिवहन के लिए खोल दिए जाने की उम्मीद है। हलाकि पिछले वर्ष ही उम्मीद की जा रही थी के इस सड़क न निर्माण पूरा हो जायेगा, पर ऐसा हो नही पाया

इस सड़क की चौड़ाई 12 मीटर है जिसमे 2.5 मीटर की जगह सड़क के दोनों और छोड़ी गयी है। जिस से लग भी इस फूटपाथ पर आसानी से चल सके

यह सड़क इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्युकी इसे बनने में पूरे 50 साल लग गये है .

मान्यता 

धनुषकोडी में लगभग हर दिन 500 श्रद्धालु आते है और त्योहारों में ये संख्या बहुत बढ़ जाती है . कहते है विभीषण के कहने पर श्रीराम ने यही खड़े हो कर अपने धुनष से एक सिरे से लंका तक बना पुल तोडा था, इसीलिए इसे धनुषकोडी नाम मिला.

धनुषकोडी को भूतो का शहर भी कहा जाता है

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