पृथ्वी कैसी होगी 10,000 साल बाद

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क्लाइमेट scientists ने नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में खुलासा किया है की ग्लोबल वार्मिंग सिर्फ अगले 100 साल या उस से कुछ जायदा समय तक ही रहेगी तो हम गलत है क्यूंकि क्लाइमेट चंजेस 10,000 साल तक होते रहेंगे.

और कुछ दशक ही है हमारे पास जब हम प्रलयकारी क्लाइमेट चेंज को कम कर सकते है. वरना यह बदलाव लम्बे समय तक चलेंगे. क्यूंकि आज हम तेल, कोयले, गैस का इस्तेमाल बिना सोचे समझे करते जिसका खामियाजा हमारी आने वाली गेनेरातिओंस को भूगतना पडेगा. सबसे बड़ा कारण है कार्बन डाइऑक्साइड का अभी भी बढता हुआ एमिशन जो की कुछ दशको तक नींचे आने की कोई उम्मीद नहीं है. मुश्किल यह है की कार्बन डाइऑक्साइड जल्दी से नहीं हटती अत्मोस्फेरे से उसको कई सदिया लग जाती है. कार्बन डाइऑक्साइड का बड़ा हिस्सा अत्मोस्फेरे में हज़ार सालो तक रहेगा और तब जा कर नेचुरल process से रीमूव होगा. जबकि सील लेवल बढता होता रहेगा ग्लोबल वार्मिंग के साथ.

यह पूरी तरह से हम पर निरभर होगा की वर्षो बाद धरती कैसी हो. सो अगले 100 सालो में हम कितना फॉसिल फ्यूल उसे करंएगे या फिर कोई टेक्नोलॉजी से कार्बन डाइऑक्साइड को हटा पाएंगे बड़े स्केल पर जितना की हम आज एमिट कर रहे है प्रयावरण में.

आज लगभग हम 10 गिगाटन कार्बन डाइऑक्साइड एमिट करते है वातावरण में हर साल और पिछली दो शताब्दियो में लगभग ५८० billion मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड को हमने उत्सर्जित किया है वातावरण में. और इस शताब्दी में हम ७०० गिगाटन उत्सर्जन और करेन्गे. कुल मिलकर उत्सर्जन 1280 गीगा टन हो जायेगा. या फिर और तेजी से फॉसिल फ्यूल्स को इस्तेमाल करते हुए 5120 गीगा टन तक जायेंगे. अगर हम पूरी तरह से दुरुप्रयोग करते है वयावरण का तो हम 7 डिग्री सल्सिउस टेम्परेचर को बड़ा देंगे धरती के. जो 52 मीटर्स उन्चा कर देगा समुद्र के लेवल को.

फिर भी स्सिंटिस्ट मनते है की मनुष्य विकसित कर लेगा ऐसी तकनीक जिस से हम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम कर सकेंगे या फिर कार्बन डाइऑक्साइड को हटा पाएंगे वातावरण से.

Source: थी वाशिंगटन पोस्ट

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