Homosexuality और Mythology

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भारतीये माइथोलॉजी में कई ऐसे उदारहण है जहा homosexual या समलेंगिक एनकाउंटर्स का जीक्र आता है.

 

महाभारत में क्रिशन जी एक स्त्री का रूप धारण करते है. अर्जुन और उलूपी पुत्र अरावन की इचछा पूरी करने के लिये युद्ध में जाने से पहले विवाहित सुख प्राप्त करने के लिए जो संभव नहीं था क्यूंकि अरावन का मरना निश्चित था युद्ध में और जिसका मरना निश्चित हो उससे कोई विवाह नहीं करना चाहता था तब भगवन क्रिशन ने मोहिनी का रूप धर के अरावन की इस इच्छा को पूरा किआ था.

 

यही नही मोहिनी का रूप धर कर विष्णु भगवन ने शिव भगवन के झने पर भस्मसुर का वध किआ था. शिव भगवन मोहिनी के रूप से सम्मोहित होकर मोहिनी का पीछा करते है. अर्जुन भी अज्ञातवास में स्त्री का रूप धर के गुप्त रूप से कौरवो से छुप कर रहते है.

 

इतने सारे उदारण होते हुए भी आज इंडिया में जिस तरह का संक्रिन सोच है स्म्लेंगिता को लेकर और विशेष तौर पे धरम के ठेकेदारों द्वारा वोह उनकी अज्ञानत को दर्शाता है. स्म्लेंगिता कोई बीमारी नहीं है. जिसका इलाज अवशक है अपितु इसको एक नेचुरल आचरण मानकर देखना चईये न की किसी मानसिक या शारीरिक विकअरता. भारत में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सेक्शन 377 के तेहत 150 वर्ष पूर्व कानून को बदला दिया गया था और consensual homosexuality को सही कहा था. परन्तु सर्वोच्य न्यालय ने दिल्ली हाई कोर्ट के जजमेंट को ओवेर्रुल करते ही इससे फिर से लागू कर दिया.

 

स्म्लेंगिता को विकार मान हम Gay Rights छीन रहे जो की उनका मौलिक अधिक्कर है.

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