जिसका कोई नहीं उसका तो यह खुदा है यारो

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हम बात कर रहे है गुरमीत सिंह की जो पटना, बिहार के वासी है और उनका यह रूटीन पिछले 20 वर्षो से चल रहा है, वह रात उन बिमारो की तिमारदारी करते है जिनका कोई नहीं है. वह उन्हें सिर्फ खाना और दवाई ही नहीं देते लेकिन उनका गम भी बाटते है और उनके चेहरे पर ख़ुशी भी ले के आते है. पेशे से 60 वर्षीय गुरमीत सिंह एक कपडे की दुकान चलते है. परन्तु रात के नौ बजते ही वह पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सब लावारिस पेशेंट्स के लिये किसी भगवान से कम नहीं. यह हॉस्पिटल सबसे बड़ा पटना का हॉस्पिटल है, और इसके लावारिस वार्ड के लावारिसो के लिये गुरमीत सिंह किसी फरिशते से कम नहीं.

वह और उनके पांच नही अपनी 10 प्रतिशत कमाई हर महीने एक डोनेशन बॉक्स में डालते है और इस नेक काम में लगाते है. वार्ड में जाकर वह हर एक पेशेंट का हाल लेते है. उनकी प्रिस्क्रिप्शन में मेहेंगी दवाइयों और टेस्ट्स के लिये पैसे देते है. वह कई बार ब्लड भी डोनेट कर चुके है. सभी को उस वार्ड में स्वय खाना परोसते है.

उनकी यह यात्रा कुछ 20 साल पहले शुरू हुई जब उनकी दूकान पर एक महिला प्लास्टिक बैग्स बेचने आयी. उस महिला के साथ एक छोटा बच्चा जिसकी स्किन बुरी तरह से जली हुई थी को हरमीत सिंह हॉस्पिटल ले गए परन्तु strike होने के कारण गरीब और लावारिस सबसे जायदा प्रभावित थे. तभी उन्होंने इस बारे में कुछ करने की ठानी और लगातार इतने सालो से सेवा कर रहे इन लावारिस लोगो की. Authorities उनको इस काम के लिए काफी बार प्र्सष्टि पत्र भेजे परन्तु उनहे इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता, वह निष्फल भाव से सेवा करते जा रहे है.

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