अब सब बदल चूका है

    बल्दव अच्छा बुरा नही होता, वोह सिर्फ बदलाव होता है !

    0
    141

    ज्यादा नही 5 साल पहले की ही बात करते है, तब और अब की दुनिया में बहुत फर्क आ, और इस बदलाव के पीछे 2 चीजों का सबसे बड़ा हाथ है ; 1) मोबाइल 2) इन्टरनेट

    अब हर हाथ में एक सुपर स्मार्ट फ़ोन है , जिस से आप पूरी दुनिया से कनेक्ट हो जाते हो, आप चाहे जिस भी जगह हो अपने चाहने वालो की हर गति विधि को आप सोशल मीडिया के जरिये देख सकते है.

    दूसरा है इन्टरनेट, जो आपके मोबाइल को दुनिया से जोड़ने का काम करता है, और अब तो इन्टरनेट की स्पीड भी 4G हो गयी है, पहले ऐसा नही था. पहले तो एक वेबपेज भी रेंगता हुए खुलता था .

    दूसरा इन दोनों ने मिल कर लोगो को जागरूक भी किया है, अब ट्विटर की ही बात कर लीजिये, अब हर कोई पत्रकार है, अपने विचार जब चाहे जहा चाहे उस तरह से बया करो, बिना किसी रोक टोक के. ये सब सहुलिययत देने वाला सबसे बड़ा हीरो इन्टरनेट ही है .

    पहले ना ही तो अब जैसे फ़ोन्स थे, ना इन्टरनेट, ना सेट टॉप बॉक्स, ना ही HD चैनल्स – तब और अब का फर्क दीखता साफ़ है, पर कुछ लोगो का हुजूम ऐसा भी है जो अब तक चाहते हुए भी इन चीजों को अपना नही पाया है, इसके पीछे उनके अपने तर्क है, पर आज के बच्चे इसे पुराणी सोच कह आगे निकल जाते है.

    बदलाव, अच्छा है या बुरा ये तह इस बात से होता है के आप उसे किस तरह से देखते है, आपकी सोच, आपका नज़रिया ही ये तह करता है के आप इस नये बदलाव को अपनाना चाहते है के नही .

    भारत शुरू से ही एक तहजीबदार देश रहा है, हम मेहमान में भी भगवन को देखते है , और ये ही कुछ ऐसी पुराणी परम्परा की कसोटी है जो हम आज के इस संसार को देना चाहते है, और ये भी चाहते है के आज के युग के ये फूल आगे आने वाली अपनी पीढ़ी को भी ये संस्कार दे.

    संसकारो की बात तो आप यह तक कह सकते है के इज्जत तो हम खाने पीने की चीजों को भी दे ते है,
    बिस्कुट भी यह जी (पारले ) है और चिप्स (अंकल) है .  

    Comments

    comments

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here