NSG सदस्यता में चीन ने अटका दिया रोड़ा, सियोल में महीने के अंत में होगी अगली बैठक !!

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48 देशों के समूह एनएसजी(NSG) में चीन के अलावा न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया भी भारत की दावेदारी के विरोध में हैं.

 

चीन इन सभी देशो की अगुवाई कर रहा है .

 

भारत की NSG सदस्यता के बीच सबसे बड़े रोड़े के रूप में खड़ा है चीन, अमेरिका का सहयोग भी चीन के रुख को बदल नहीं पाया, बल्कि चीन ने अमेरिका पर यह आरोप तक लगाया के वोह एशिया-प्रशांत क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है .

 

हालाकि चीन ने बड़े ही राजनेतिक ढंग से भारत का विरोध किया, हालाकि उसने सीधे सीधे अपना विरोध ना जता कर इसे , एनपीटी पर दस्तखत न करने से जोड़ा. 

 

चीन के अनुसार परमाणु अप्रसार संधि(NPT) पर जिन देशो ने हस्ताक्षर किये है उन्हें ही NSG की सदयस्ता मिलनी चाहिए, चीन कहता है अगर भारत को रियायत दी जा रही है तो पाकिस्तान को भी रियायत मिलनी चाहिए और उसे भी NSG ग्रुप में शामिल किया जाना चाहिए .

 

चीन किसी भी तरह से यही चाहता है के भारत NSG में शामिल ना हो पाए, जिस से वोह कभी चीन की बराबरी नहीं कर पायेगा और चीन एशिया का सबसे ताकतवर मुल्क बना रहेगा.

 

जहा तक पाकिस्तान की बात है तो चीन अब उसका नया आका बन चूका है, अमेरिका पाकिस्तान का हाथ छोड़ चूका है तो अब पाकिस्तान को किसी न किसी का तो साथ चाहिए ही खुद के लिए तो उसने चीन का दामन थाम लिया है .

 

चीन ये जानता है के अगर अमेरिका भारत के इतने करीब है तो आने वाले समय में उसके लिए खतरा पैदा हो सकता है, और चीन भारत को एक प्रितिद्वंदी के रूप में तो देखता ही है, हर एक पटल पर, तो उसका पाकिस्तान की तरफदारी कर भारत की NSG सदयस्ता की रह में रोड़ा अटकाना लाज़मी है .

 

इस महीने के अंत में दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में  होने वाले एनएसजी के पूर्ण अधिवेशन में भारत को उम्मीद है की कुछ सकारात्मक निर्णय हो सकता है, पर जहा तक चीन को हम समझते है, तो वोह यह कतई होने नहीं देगा .

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