Thursday, August 24, 2017

आखिर क्यों है भोले शंकर को सावन का महिना इतना पसंद, जाने इसके पीछे...

भोले शंकर की महिमा अपरम्पार है , सावन का महिना जी ही शुरू होता है पूरा हिन्दू समाज भोले की भक्ति में डूब जाता है, कावडियो का जोश तो जैसे देखते ही बनता है,...

चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस से जानिए एक नागरिक का कर्ज़, फर्ज़ और उद्देश्य...

हर एक इन्सान एक नागरिक है, आप मैं या वोह जिसे हम लोग जानते है, और वोह भी जिसे हम लोग नही जानते है . हम सभी अपने अपने देश के नागरिक है . हर नागरिक...

राशी ग्रह, और ग्रहों के स्वामी देवता

सूर्य के देवता विष्णु, चन्द्र के देवता शिव, बुध की देवी दुर्गा, ब्रहस्पति के देवता ब्रह्मा, शुक्र की देवी लक्ष्मी, शनि के देवता शिव, राहु के देवता सर्प और केतु के देवता गणेश। जब...

उर्वशी के श्राप से बने थे अर्जुन नपुंसक, पढ़े पूरी कथा !!

एक श्राप जो बन गया था वरदान ... उस दिन अर्जुन के गुरु और मित्र चित्रसेन अर्जुन को नृत्य और संगीत की दीक्षा दे रहे थे के तभी वह देवलोक की अप्सरा उर्वशी का आगमन...

कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य के जन्म की विचित्र कथा

गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने...

काली माता जी की आरती

काली माता जी की आरती मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे। पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।। जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै...

माँ सीता जी की आरती

 माँ सीता जी की आरती   सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब मिलिकय करियनु आरती। संगहि सुशोभित लछुमन-राम सब मिलिकय करियनु आरती।। विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर,सीता धिया बनि अयली सुनयना घर मिथिला के महिमा महान...सब मिलिकय करियनु आरती।। सीता बिराजथि मिथिलाधाम सब...

जानिए और जपिए भगवान शिव के 108 नाम

भगवान शिव के 108 नाम ---- शिव - कल्याण स्वरूप महेश्वर - माया के अधीश्वर शम्भू - आनंद स्स्वरूप वाले पिनाकी - पिनाक धनुष धारण करने वाले शशिशेखर - सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले वामदेव - अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले विरूपाक्ष...

संतोषी माता की आरती

संतोषी माता की आरती जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥ जय सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो । हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ॥ जय गेरू लाल छटा...