Monday, May 28, 2018
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धृतराष्ट्र,पाण्डु तथा विदुर के जन्म की विचित्र कहानी …..!!

सत्यवती के चित्रांगद और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुये।   शान्तनु का स्वर्गवास चित्रांगद और विचित्रवीर्य के बाल्यकाल में ही हो गया था इसलिये उनका पालन पोषण भीष्म ने किया। भीष्म ने चित्रांगद के बड़े होने...

सावन के इस पवित्र महीने में ‘शिव परिवार’ के सुखद दर्शन कीजिये ..!!

सावन के इस बेहद पवित्र महीने में जब सारी दिशाए भोले की जय जयकार के गूँज उठती है, तब मन में एक असीम शांति का अहसास सा जगता है, यह सुखद शांति का अहसास...

आखिर क्यों है भोले शंकर को सावन का महिना इतना पसंद, जाने इसके पीछे...

भोले शंकर की महिमा अपरम्पार है , सावन का महिना जी ही शुरू होता है पूरा हिन्दू समाज भोले की भक्ति में डूब जाता है, कावडियो का जोश तो जैसे देखते ही बनता है,...

द्रोणाचार्य विवाह, अश्वत्थामा जन्म तथा द्रोणाचार्य के पांड्वो और कौरवो के गुरु बनने तक...

परभू परशुराम से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात द्रोण का विवाह कृपाचार्य की बहन कृपी के साथ हो गया। कृपी से उनका एक पुत्र हुआ। उनके उस पुत्र के मुख से जन्म के समय अश्व...

कथा – कैसे बने द्रोणाचार्य भगवान परशुराम के शिष्य …!!

उन दिनों परशुराम अपनी समस्त सम्पत्ति को ब्राह्मणों में दान कर के महेन्द्राचल पर्वत पर तप कर रहे थे।       एक बार द्रोण उनके पास पहुँचे और उनसे दान देने का अनुरोध किया। इस पर परशुराम...

कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य के जन्म की विचित्र कथा

गौतम ऋषि के पुत्र का नाम शरद्वान था। उनका जन्म बाणों के साथ हुआ था। उन्हें वेदाभ्यास में जरा भी रुचि नहीं थी और धनुर्विद्या से उन्हें अत्यधिक लगाव था। वे धनुर्विद्या में इतने...

वेदों का भाष्य करने वाले महर्षि वेदव्यास के जन्म की अद्भुत कथा ….

प्राचीन काल में सुधन्वा नाम के एक राजा थे। वे एक दिन आखेट के लिये वन गये। उनके जाने के बाद ही उनकी पत्नी रजस्वला हो गई। उसने इस समाचार को अपनी शिकारी पक्षी...

शान्तनु का निषाद कन्या सत्यवती के दूसरा विवाह, तथा भीष्म प्रतिज्ञा की अद्भुत कहानी...

माँ गंगा और शान्तनु की आठवी संतान थे देवव्रत, जिसे महाराज शान्तनु ने हस्तिनापुर का युवराज घोषित कर दिया था .     यह भी पढ़े -   शान्तनु और गंगा के विवाह की कथा तथा भीष्म का जन्म !!   एक दिन...

शान्तनु और गंगा के विवाह की कथा तथा भीष्म का जन्म !!

महाभारत से जुडी एक दुर्लभ कहानी ...   एक बार हस्तिनापुर के महाराज गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित हो कर गंगा जाँघ पर बैठ गईं। गंगा ने कहा, "हे राजन्!...

माँ काली ने की भूतो से रक्षा : पढ़े पूरी कहानी

।। जय माता दी ।। बात बहुत ही पुरानी है। उस समय ग्रामीण लोग अधिकतर एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए बैलगाड़ी आदि का उपयोग करते थे। कोई भी शुभ त्योहार हो, या कोई...

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