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पांडू पुत्रो में भीम सबसे ज्यादा बलशाली थे, उनकी भुजाओ ने हजारो हाथियों का बल समाया हुआ था, कहा तो यह भी जाता है के एक दफा भीम ने अपने भुजाओ के बल मात्र से नर्मदा नदी का प्रवाह तक रोक डाला था. पर क्या आपको यह मालूम है के भीमसेन में इतना बल आया कैसे था? इसके पीछे एक बेहद रोचक कहानी है जिसमे षड्यंत्र – दुष्टता – प्रेम – और स्नेह शामिल है .

 

कहानी की शुरुवात

कौरव पुत्र और पाण्डव दोनों एक साथ खेला करते थे, भीमसेन अपने बल से सभी कौरवो को आसानी से हरा दिया करते थे फिर चाहे वोह कोई भी खेल क्यों ना हो, भीम ऐसा प्रतिस्पर्धा में किया करते थे, उनके मन ने किसी के प्रति कोई द्वेष भावना नहीं थी. पर भीम की इस बात से दुर्योधन चिडने लगे, और धीरे धीरे इस जलन ने आग पकडनी शुरू कर दी. दुर्योधन के मन में भीम के लिए इतनी ज्यादा कडवाहट भर उठी के उन्होंने भीमसेन को मारने की योजना बना डाली.

 

भीम के खाने में जहर

गंगा नदी के तट पर दुर्योधन अपनी इस योजना को अंजाम देना चाहता था, उसने खेलने के लिए पांड्वो को भी उस जगह बुलाया जिस का नाम दुर्योधन ने रखा उदकक्रीडन, दुर्योधन ने इस जगह खान पान का भी उचित प्रबंध करा रखा था . जैसे ही दुर्योधन को मौका मिला उसने भीम के खाने में जहर मिला दिया, जहर के प्रभाव से भीम अचेत हो गये, फिर दुर्योधन ने दुशासन के संग मिल कर भीम को गंगा नदी में फेक दिया.

 

सर्पो का भीम पर हमला

गंगा नदी की गहराई में जाते जाते भीमसेन नागलोक पहुच गये, जहा उनके शरीर के ऊपर नागो ने हमला बोल दिया, अनेको सापो ने उन्हें काटना शुरू कर दिया, जैसे जहर को जहर काटता है, उसी तरह सर्पो के भीम को काटने से, दुर्योधन के दिए ज़हर का असर खत्म होने लगा. जब भीम को होश आया तो उन्होंने अपने चारो तरह सर्पो को देखा और उनसे लड़ने लगे, सर्प उनसे डर कर नागदेव वासुकी के पास पहुचे.

 

वासुकी और आर्यक नाग से भीम की भेट

सर्पो की चीख पुकार सुन नागदेव वासुकी आर्यक नाग के साथ भीम के पास पहुचे, तभी आर्यक नाग ने भीम को पहचान लिया. आर्यक नाग रिश्ते से भीम के नाना के नाना थे, उन्होंने भीम से मिल कर उनसे बेहद प्रेम किया, स्नेह दिया. तब आर्यक नाग ने नागदेव वासुकी से प्राथना की भीमसेन को उन कुंड़ो का पानी पीने दिया जाये जिसमे हजारो हाथियों का बल है .

 

भीम में आया हज़ार हाथियों का बल

नागदेव वासुकी ने आर्यक नाग की बात का सम्मान रखते हुए, भीम को उन कुंड़ो का जल ग्रहण करने की अनुमति दे दी , तब भीम सेन ने आठ कुंड़ो का पानी पी लिया और उस के बाद दिव्य शैया पर जा कर सो गये .

 

भीम के ना मिलने से पांड्वो में हाहाकार

दुर्योधन अपने किये पे बहुत खुश हुआ, उसके रस्ते का एक काटा अब हट चूका था, पांड्वो ने भीम को हर जगह ढूंडा, पर उन्हें वोह कही ना मिले, भीम के बिना ही पांड्वो ने हस्तिनापुर के लिए कूच किया, यह सोच के भीम शायद पहले ही हस्तिनापुर के लिए निकल चुके होंगे. जन पांडव हस्तिनापुर पहुचे तो युधिष्ठिर के माता कुंती से भीम के बारे में पुछा, माता कुंती ने युधिष्ठिर को बताया के भीम अभी तक नहीं पहुचे है. इस से माता कुंती को भीम की चिंता सताने लगी, उन्होंने विदुर से यह बात कही, विदुर ने सैनिको को भीम को ढूँढने के लिए भेजा. पर सैनिको को भीम कही नहीं मिले.

 

भीम की हस्तिनापुर में वापसी

जिन कुंड़ो का रस भीम ने पिया था, उसे पचने में 8 दिन का समय लगा, जब आठवे दिन भीम दिव्य शैया से उठे तब नागो ने उन्हें गंगा नदी के बाहर तक आदर प्रेम से छोड़ा. तब भीम स्वयं ही हस्तिनापुर पहुचे, उन्हें वहा देख माता कुंती और पांडू पुत्रो में ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी. भीम ने सारा किस्सा माता कुंती और अपने सभी भाइयो को कह सुनाया, पर कुछ सोच कर सभी ने इस बात को सबसे छुपाने का निर्णय लिया .

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