वाराणसी के अघोरी

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अगर आप वाराणसी गये है तो आपने अघोरी बाबाओं को जरूर देखा या उनके बारे में सुना होगा. अघोरी साधु बनना कोई आसन काम नहीं है, इसकेलिये बहुत कठिन और विचित्र परक्रिया की साधना होता है जिनके बारे में सुनके ही साधारण व्यक्ति के होश उठ जाये. अघोरी साधु शिव-काली भक्त होते हैं और सभी साधना इत्यादि यह शमसान भूमि में करते हैं.

वह अपने शारीर पर शमसान राख लगते है और जली हुई बॉडीज का सेवन भी करते है. उनका मानना हैं की जीवन, मृत्यु और किसी भी भौतिक वस्तु में कोई अंतर नहीं है. भेदबाव हमारे दिम्माग से समभंदित हैं वास्ताव में सब मिथ्या है.

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